चंडीगढ़। मानसून से पहले बाढ़ के खतरे को देखते हुए राज्य सरकार ने तैयारियां तेज कर दी है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोमवार को उच्चस्तरीय बैठक में राज्य की बाढ़ प्रबंधन व्यवस्था की समीक्षा करते हुए नदियों और ड्रेनों की सफाई के लिए अत्याधुनिक एम्फीबियस मशीनें खरीदने को मंजूरी दे दी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य समय रहते ठोस कदम उठाकर जानमाल और फसलों को नुकसान से बचाना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ये मल्टीपर्पज मशीनें बहते पानी में भी काम करने में सक्षम हैं और गहराई तक डीसिल्टिंग कर सकती हैं। इससे नदियों, नालों और जलाशयों की सफाई अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगी। उन्होंने संबंधित विभागों को मशीनों की खरीद के लिए विस्तृत योजना तैयार करने के निर्देश दिए। मान ने कहा कि फिनलैंड दौरे के दौरान उन्होंने इन मशीनों का सफल उपयोग देखा था, जो अब पंजाब में भी बाढ़ प्रबंधन को मजबूत बनाएंगी।
जल प्रबंधन पर मुख्यमंत्री ने भाखड़ा डैम के जलस्तर का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 26 अप्रैल को जलस्तर 1594 फीट दर्ज किया गया, जबकि अधिकतम क्षमता 1680 फीट है। उन्होंने निर्देश दिए कि एक जून से शुरू होने वाली धान की बुआई को ध्यान में रखते हुए नहरों में सुचारू रूप से पानी छोड़ने की योजना बनाई जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि 31 मई तक राज्य में पुराने खालों की मुरम्मत करने का काम पूरा हो जाएगा। नए खालों का निर्माण भी किया जाएगा। बैठक में जल संसाधन विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने संतोष जताया। उन्होंने कहा कि राज्यभर में ड्रेनों की सफाई तेजी से जारी है और बाढ़ संभावित इलाकों में डीसिल्टिंग का काम काफी हद तक पूरा हो चुका है। इससे मानसून के दौरान संभावित खतरे को कम करने में मदद मिलेगी।
रूपनगर जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि यहां करीब 20 गांव पिछले साल बाढ़ से प्रभावित हुए थे, जिसके मद्देनजर इस बार रोकथाम के लिए व्यापक कदम उठाए गए हैं।
साथ ही स्वां नदी के चैनलाइजेशन की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं, ताकि सिंचाई और पर्यटन दोनों को बढ़ावा मिल सके। बैठक में कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस, बरिंदर कुमार गोयल, सांसद मलविंदर सिंह कंग और मुख्य सचिव केएपी सिन्हा समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
