देहरादून: देवभूमि उत्तराखंड में आज बाबा केदारनाथ के कपाट खुल चुके हैं. इस दौरान 10 हजार से अधिक श्रद्धालु कपाटोद्घाटन के साक्षी बने. केदारनाथ के साथ ही आज पंच केदारों में प्रतिष्ठित तुंगनाथ महादेव मंदिर के कपाट भी वैदिक मंत्रोच्चार के बीच खोल दिए गए हैं. सीएम धामी ने चारधाम एवं पंच केदार यात्रा पर देवभूमि उत्तराखंड पहुंचने वाले सभी श्रद्धालुओं का हृदय से स्वागत, अभिनंदन और मंगलमय यात्रा की शुभकामनाएं दी हैं.
बता दें इससे पहले भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली 20 अप्रैल को मक्कूमठ से रवाना हुई थी. ये डोली प्रथम रात्रि प्रवास को लेकर भूतनाथ मंदिर पहुंची. 21 अप्रैल को डोली विभिन्न पड़ावों से होते हुए चोपता पहुंची. 22 अप्रैल को चोपता से प्रस्थान कर तुंगनाथ धाम पहुंची. जहां आज विधि-विधान के साथ तुंगनाथ धाम के कपाट खोल दिये गये हैं.
तुंगनाथ मंदिर की विशेषता: तुंगनाथ धाम हिमालय की ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं के मध्य समुद्र तल से लगभग 3,680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. तुंगनाथ तृतीय केदार के रूप में जाना जाता है. तुंगनाथ धाम अपनी दिव्यता, प्राचीनता और आध्यात्मिक आभा के लिए विश्वविख्यात है. पंचकेदारों में तृतीय स्थान रखने वाला यह पवित्र धाम भगवान शिव की भुजाओं (बाहुओं) के रूप में पूजित है. मान्यता है कि महाभारत युद्ध के पश्चात पांडवों ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए यहां कठोर तप किया था, जिससे यह स्थल विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण माना जाता है.
तुंगनाथ मंदिर पत्थरों की अद्भुत स्थापत्य शैली का अनुपम उदाहरण है, जिसे आदि शंकराचार्य द्वारा पुनर्स्थापित किया गया माना जाता है. मंदिर के गर्भगृह में स्थापित स्वयंभू शिवलिंग श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र है. हर वर्ष ग्रीष्मकाल में हजारों श्रद्धालु कठिन पर्वतीय मार्ग पार कर यहां पहुंचते हैं और भगवान तुंगनाथ के दर्शन कर आध्यात्मिक शांति का अनुभव करते हैं.
तुंगनाथ धाम से लगभग डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर स्थित चंद्रशिला शिखर ट्रैकिंग प्रेमियों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र है. लगभग 4,000 मीटर की ऊंचाई से चौखम्भा, नंदा देवी, त्रिशूल, केदारनाथ सहित अनेक हिमालयी चोटियों का विहंगम दृश्य यहां से देखा जा सकता है. सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यहां का दृश्य अत्यंत मोहक और अविस्मरणीय होता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान राम ने लंका विजय के पश्चात यहां तपस्या की थी, जिससे इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है.
