लखनऊ। दिल्ली से पूर्वोत्तर भारत को जोड़ने वाले सबसे व्यस्त रेल खंडों में से एक, गाजियाबाद-सीतापुर रूट पर तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने की योजना को केंद्रीय कैबिनेट ने हरी झंडी दे दी है।
यह प्रोजेक्ट न सड़कों पर ट्रैफिक लोड कम करके ट्रेनों की लेटलतीफी दूर करेगा। खास बात यह है कि हरिद्वार, गढ़मुक्तेश्वर और दूधेश्वरनाथ जैसे तीर्थ स्थलों को सीधे नैमिषारण्य धाम से जोड़कर एक नया धार्मिक सर्किट तैयार करेगा।
वर्तमान में लखनऊ से हरदोई-मुरादाबाद होकर दिल्ली और पंजाब की ओर प्रतिदिन लगभग 120 यात्री ट्रेनें और 40 मालगाड़ियां गुजरती हैं। बालामऊ और रोजा जंक्शन पर अन्य रूटों की ट्रेनों का दबाव जुड़ने से इस सेक्शन की पंचुअलिटी (समय पालन) 60 प्रतिशत से भी कम रह गई है।
तीसरी और चौथी लाइन बनने से ट्रेनों को बीच सेक्शन में नहीं रुकना पड़ेगा, जिससे दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, पंजाब और गुवाहाटी तक का सफर तेज हो जाएगा। एक अनुमान है कि इस नई रेल लाइन से माल ढुलाई में सालाना 36 मिलियन टन की वृद्धि होगी। अब तक गाजियाबाद से सीतापुर के बीच केवल दो लाइनें हैं।
चूंकि यह रूट दिल्ली को सीधे पूर्वोत्तर से जोड़ता है, इसलिए यहां पैसेंजर ट्रेनों के साथ-साथ कोयला, खाद्यान्न और पेट्रोलियम ले जाने वाली मालगाड़ियों का भारी दबाव रहता है। तीसरी और चौथी लाइन बिछने के बाद मालगाड़ियों के लिए एक अलग रास्ता मिल जाएगा। इससे पूर्वोत्तर भारत के लिए आवश्यक सामग्री बिना किसी देरी के पहुंच सकेगी।
यह रूट भौगोलिक रूप से नेपाल सीमा के समानांतर चलता है। सीतापुर से आगे बढ़कर यह रेल लाइन गोंडा, बस्ती और गोरखपुर होते हुए बिहार और फिर पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ीतक पहुंचती है, जो पूर्वोत्तर भारत का प्रवेश द्वार है।
धार्मिक और पर्यटन विकास को नई उड़ान
अयोध्या में मंदिर के निर्माण के बाद नैमिषारण्य आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भारी उछाल आया है। गाजियाबाद-सीतापुर फोरलेन प्रोजेक्ट भविष्य में नैमिष धाम-अयोध्या-काशी विश्वनाथ की यात्रा के लिए तैयार होने वाले नए रेल सर्किल का मुख्य आधार बनेगा। इससे मुरादाबाद से हरिद्वार की 126 किलोमीटर की यात्रा भी तेज और सुगम होगी।
प्रोजेक्ट एक नजर में
- 06 नए स्टेशन और आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर
- 403 किलोमीटर रूट लेंथ (कुल ट्रैक 859 किमी) पर फैला होगा
- 04 वर्षों में धरातल पर उतरेगा 14,926 करोड़ की यह परियोजना
नए स्टेशन: न्यू हापुड़, न्यू मुरादाबाद, न्यू रामपुर, न्यू बरेली, न्यू शाहजहांपुर और न्यू सीतापुर (भगवानपुर गांव) के रूप में छह आधुनिक स्टेशन बनाए जाएंगे।05 मेगा ब्रिज, 52 बड़े पुल और 238 रोड अंडरब्रिज का निर्माण किया जाएगा।
एनसीआर और एससीआर का संगम
सीतापुर स्टेट कैपिटल रीजन यानी एससीआर का हिस्सा है। इस प्रोजेक्ट के जरिए रेलवे का लक्ष्य एससीआर को नेशनल कैपिटल रीजन (एनसीआर से मजबूती से जोड़ना है।
उद्योगों को लाभ: गाजियाबाद की मशीनरी, मुरादाबाद का पीतल उद्योग, शाहजहाँपुर का फर्नीचर और सीतापुर के दरी व कृषि आधारित उद्योगों को वैश्विक बाजार मिलेगा।
बड़ा निवेश: सीतापुर में सेंचुरी प्लाइवुड (₹तीन हजार करोड़) और रेडिको खेतान (₹2,700 करोड़) जैसे बड़े निवेश पहले ही आ चुके हैं। नई रेल लाइन से माल ढुलाई में सालाना ₹2,877 करोड़ की बचत होगी।
पर्यावरण व रोजगार: इस प्रोजेक्ट से 264 लाख मानव दिवस का रोजगार सृजित होगा।
