उत्तर प्रदेश में पूर्व अपर आयुक्त केशवलाल सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) की जांच में फंस गए हैं। विजिलेंस जांच में वाणिज्य कर विभाग, कानपुर के तत्कालीन अपर आयुक्त केशवलाल (अब सेवानिवृत्त) की उनकी आय से 1700 गुना अधिक कमाई सामने आई है। उनकी कुल 25 करोड़ रुपये की संपत्तियों का पता चला है। इनमें लखनऊ, कानपुर, नोएडा, गाजियाबाद व प्रयागराज स्थित मकान व भूखंड भी शामिल हैं। शासन की अनुमति पर विजिलेंस कानपुर सेक्टर में आरोपी पूर्व अपर आयुक्त केशवलाल के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति का मुकदमा दर्ज कर आगे की जांच शुरू की गई है।
शासन ने सितंबर 2023 में विजिलेंस को आरोपी केशवलाल के विरुद्ध खुली जांच सौंपी थी। जांच के लिए निर्धारित अवधि में आरोपी की कुल आय एक करोड़ रुपये थी और इसी अवधि में संपत्तियों के अर्जन-भरण पोषण में किया गया खर्च 18.27 करोड़ रुपये पाया गया। एफआईआर के अनुसार आय से अधिक संपत्ति को लेकर वह कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। विजिलेंस के अनुसार वर्ष 2017 में आयकर विभाग ने आरोपी के कानपुर व नोएडा समेत अन्य ठिकानों पर छापेमारी की थी। छापेमारी में 11 करोड़ रुपये नकद, लगभग 3.5 करोड़ रुपये के जेवर व संपत्तियों के दस्तावेज बरामद हुए थे।
देवरिया के बरहज की पूर्व अध्यक्ष रेनू जायसवाल के घर पहुंची विजिलेंस टीम
वहीं सतर्कता विभाग लखनऊ की टीम गुरुवार को नगर पालिका गौरा बरहज की पूर्व अध्यक्ष रेनू जायसवाल के घर पहुंची। टीम ने नपा और रजिस्ट्री कार्यालय में भी अभिलेखों का अवलोकन किया। रेनू जायसवाल 2001 से 2006 तक नगर पालिका गौरा बरहज की अध्यक्ष रही। 2002 में इनके खिलाफ प्रदेश के विभिन्न शहरों में आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायत की गई थी। शिकायत की जांच के सिलसिले में लखनऊ मुख्यालय के मुख्य सतर्कता अधिकारी कमलेश यादव के नेतृत्व में विजिलेंस टीम गुरुवार को दोपहर में बरहज स्थित उनके आवास पर पहुंची। रेनू जायसवाल के घर पर न होने से जांच आगे नहीं बढ़ सकी। वहां से निकलने के बाद विजलेंस टीम के सदस्यों ने रजिस्ट्री कार्यालय में उनकी भूत संपत्ति से जुड़े अभिलेखों को खंगाला। टीम नगर पालिका कार्यालय में भी जांच करने गई। शाम तक टीम नगर में जमी रही। जांच को लेकर नगरपालिका में अफरा-तफरी मची रही। वर्तमान में रेनू जायसवाल की बहू बरहज की चेयरपर्सन हैं।
