प्रयागराज: कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के एक विवादित बयान को लेकर दाखिल याचिका पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपना निर्णय सुरक्षित कर लिया है. संभल स्थित चंदौसी कोर्ट के एक पुराने फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी, जिसमें राहुल गांधी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग वाली अर्जी खारिज कर दी गई थी. न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान ने इस मामले की सुनवाई की और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा. याचिकाकर्ता सिमरन गुप्ता ने राहुल गांधी के उस भाषण को आधार बनाया है जो उन्होंने पिछले वर्ष दिल्ली में दिया था.
‘इंडियन स्टेट’ से लड़ने का है आरोप: 15 जनवरी 2025 को दिल्ली में कांग्रेस के नए मुख्यालय ‘इंदिरा भवन’ के उद्घाटन समारोह के दौरान राहुल गांधी ने एक भाषण दिया था. इस भाषण में उन्होंने कहा था कि कांग्रेस की लड़ाई अब केवल भाजपा या आरएसएस जैसे किसी राजनीतिक संगठन से नहीं रह गई है. उन्होंने आरोप लगाया था कि भाजपा और आरएसएस ने देश की हर संस्था पर कब्जा कर लिया है और अब उनकी लड़ाई खुद ‘इंडियन स्टेट’ (भारतीय राज्य) से है. उनके इसी बयान को देश की संप्रभुता और संवैधानिक ढांचे के खिलाफ बताते हुए अदालत में चुनौती दी गई है.
संभल कोर्ट से हाई कोर्ट तक का सफर: याची सिमरन गुप्ता ने शुरुआत में संभल की विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग को लेकर अर्जी दाखिल की थी. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने क्षेत्राधिकार का हवाला देते हुए इसे खारिज कर दिया था, जिसके बाद मामला जिला जज की अदालत में पहुंचा. मई 2025 में संभल की जिला अदालत ने राहुल गांधी को नोटिस जारी किया था, लेकिन बाद में सत्र न्यायालय ने इसे ‘कमजोर’ करार देते हुए याचिका खारिज कर दी थी. अब इसी फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की गई है जिस पर अंतिम निर्णय आना बाकी है.
संवैधानिक ढांचे को चुनौती देने का तर्क: याचिकाकर्ता के वकील सचिन गोयल का तर्क है कि राहुल गांधी का बयान भारतीय राज्य की संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है और संवैधानिक ढांचे को सीधी चुनौती देता है. उन्होंने दलील दी कि मीडिया की स्वतंत्रता और संस्थानों की कार्यप्रणाली पर ऐसे बयान देना देश के हितों के खिलाफ है और इस पर कानूनी कार्रवाई आवश्यक है. दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने इन आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है. अदालत अब यह तय करेगी कि क्या निचली अदालत का फैसला सही था या इस मामले में राहुल गांधी के खिलाफ जांच के आदेश दिए जाने चाहिए.
