प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि मुस्लिम कानून में तलाक कहने की प्रक्रिया पूरी होते ही तलाक हो जाता है। यदि अदालत से तलाक की डिक्री ली जाती है तो वह तलाक नहीं, केवल पहले से दिए तलाक की घोषणा मात्र है।
एकलपीठ ने याचिका आंशिक रूप से स्वीकार की
न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह की एकलपीठ ने प्रयागराज की हुमैरा रियाज की याचिका आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए कहा, ‘कानून के अंतर्गत जब कोई पति तलाक का ऐलान करता है, तो वह उसी तारीख से लागू माना जाता है जिस दिन उसकी घोषणा पूरी की गई थी, न कि उस तारीख से जब अदालत उस पर अपनी मुहर लगाती है। तलाक के संबंध में अदालत द्वारा पारित आदेश केवल ‘घोषणात्मक’ प्रकृति का होता है और जो पूर्व में हो चुके तलाक को कानूनी मान्यता प्रदान करता है। यह आदेश किसी नई वैवाहिक स्थिति को जन्म नहीं देता, बल्कि पहले से मौजूद स्थिति की पुष्टि करता है।’
फैमिली कोर्ट के आदेश को दी चुनौती
हुमैरा ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उसके गुजारा भत्ता के दावे को यह कहते हुए खारिज कर दिया गया था कि दूसरे निकाह के समय पहले पति से तलाक की अदालती डिक्री प्राप्त नहीं हुई थी। हाई कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि यदि शौहर ने कानून के अनुसार पहले ही तलाक दे दिया था तो उसे उसी समय से प्रभावी माना जाएगा।
हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट का रद किया निर्णय
अदालत ने माना कि फैमिली कोर्ट ने तलाक के आदेश की प्रकृति को समझने में कानूनी त्रुटि की है। हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट का निर्णय रद करते हुए मामला उसके पास वापस भेज दिया है। निर्देश दिया है कि दोनों पक्षों को सुनकर छह महीने के भीतर गुण-दोष के आधार पर भरण-पोषण के संबंध में नया निर्णय लिया जाए।
क्या है मामला?
मुकदमे से जुड़े तथ्य यह हैं कि हुमैरा का निकाह पहले अब्दुल वहीद अंसारी से तीन फरवरी 2002 को हुआ था। अब्दुल वहीद ने 27 फरवरी 2005 को तलाक दिया था। इसके बाद परिवार न्यायालय में घोषणात्मक मुकदमा दायर किया गया। आठ जनवरी 2013 को पारित निर्णय में तलाक को वैध घोषित किया गया।
परिवार अदालत ने तलाक की वैधता स्वीकार की
इधर हुमैरा ने मोहम्मद दाऊद से 27 मई 2012 को दूसरा निकाह किया, जिसमें दो पुत्रों का जन्म हुआ। यह विवाह भी नहीं चला। परिवार अदालत ने 11 मई 2023 को तलाक की वैधता को स्वीकार किया। हुमैरा ने दूसरे शौहर से भरण पोषण मांगा। उसका कहना था कि दाऊद केंद्र सरकार का कर्मचारी है, उसकी अच्छी आय है। दाऊद ने हुमैरा व उनके पुत्रों का भरण-पोषण करने से इनकार कर दिया।
परिवार अदालत ने गुजारा भत्ता स्वीकार किया
परिवार अदालत ने 27 मई 2025 के आदेश में बच्चों के लिए प्रतिमाह दो हजार रुपये का गुजारा भत्ता स्वीकार कर लिया, लेकिन पत्नी के भरण-पोषण का दावा यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि पहला विवाह वैध रूप से समाप्त नहीं हुआ था, इसलिए दूसरा विवाह अमान्य है।
