देहरादून। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में शनिवार को देहरादून में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति की 90वीं बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरणीय नीतियों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में सड़क, पेयजल आपूर्ति, विद्युत प्रसारण लाइन, रक्षा, सिंचाई और अन्य आधारभूत ढांचा परियोजनाओं से संबंधित प्रस्तावों पर भी समीक्षा की गई। इसका उद्देश्य परियोजनाओं और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना था।
इस अवसर पर भारतीय वन सर्वेक्षण और भास्कराचार्य राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुप्रयोग एवं भू-सूचना संस्थान के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत वनाग्नि प्रबंधन और वन्यजीव संरक्षण को मजबूत करने के लिए भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी, दूरसंवेदी तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग आधारित उपकरणों का उपयोग बढ़ाया जाएगा।
बैठक में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की सातवीं बैठक में लिए गए निर्णयों की प्रगति की समीक्षा की गई। प्रजाति पुनर्वास, आवास प्रबंधन और संस्थागत सुदृढ़ीकरण से जुड़े राष्ट्रीय प्रयासों की स्थिति पर भी चर्चा हुई।
समिति ने चंबल नदी में पर्यावरणीय जल प्रवाह के मुद्दे पर विचार किया। इसका उद्देश्य नदी में रहने वाली प्रजातियों जैसे डॉल्फिन, घड़ियाल और अन्य जलीय जीवों का संरक्षण सुनिश्चित करना था, विशेषकर कम जल प्रवाह वाले मौसम में।
बैठक में घासभूमि और चरागाहों के संरक्षण पर भी चर्चा की गई। समिति ने कहा कि ये पारिस्थितिकी तंत्र जैव विविधता संरक्षण, कार्बन अवशोषण, शुष्क क्षेत्रों की स्थिरता और पशुपालक समुदायों की आजीविका के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। हालांकि योजना निर्माण में इन्हें पर्याप्त महत्व नहीं मिलता।
घुमंतू और पशुपालक समुदायों की संरक्षित क्षेत्रों पर निर्भरता के मुद्दे पर भी विचार-विमर्श हुआ। समिति ने कहा कि संरक्षण के लक्ष्यों और पारंपरिक आजीविका के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
बैठक में जंगली जल भैंसे के संरक्षण की स्थिति पर चर्चा हुई। समिति ने इसके लिए एक व्यापक संरक्षण कार्ययोजना तैयार करने की सिफारिश की।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत गठित एक वैधानिक निकाय है। यह वन्यजीव और वनों के संरक्षण से जुड़े विषयों पर सरकार को सलाह देती है और नीतिगत दिशा-निर्देश सुझाती है।
