हाथरस। बूलगढ़ी कांड में जेल से रिहा तीन युवकों को दुष्कर्मी कहने पर एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रहे मानहानि के मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी की ओर से सोमवार को आपत्ति पत्र दाखिल किया गया। न्यायिक अधिकारी की अनुपस्थिति के कारण मामले की अगली सुनवाई अब 13 अप्रैल को होगी।
बूलगढ़ी में अनुसूचित जाति के परिवार की युवती पर 14 सितंबर 2020 को हमला हुआ था। इसके भाई ने गांव के ही संदीप के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। बाद में युवती के बयानों के आधार पर गांव के ही रवि, रामू और लवकुश के नाम और धाराएं बढ़ाई गईं। 29 सितंबर 2020 को युवती की दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में मौत के बाद देशभर में प्रदर्शन हुए थे।
ये हुए दोषमुक्त
इस मामले में रामकुमार, रवि और लवकुश को अदालत ने दोषमुक्त कर दिया गया। इन तीनों ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानी का मामला किया। इनका कहना था कि राहुल गांधी ने 12 दिसंबर 2024 को गांव का दौरा किया था। इसके बाद इंटरनेट मीडिया पर उन्होंने पोस्ट तक तीनों युवकों को गैंगरेप का आरोपी बताया था, जबकि उन्हें दो मार्च 2023 को अदालत द्वारा दोषमुक्त किया जा चुका था।
इस संबंध में उन्होंने संसद में भी टिप्पणी की थी। सोमवार को लखनऊ से आए अधिवक्ता आलोक चंद्रा, मनीष दीक्षित, आसिफ रिजवी के साथ स्थानीय अधिवक्ता भगवती प्रसाद राहुल की ओर से आपत्ति पत्र दाखिल किया।
दलील में कहा- चलचित्र पोस्ट और वैधानिक
इसमें मुख्य रूप से कहा गया है कि परिवादी द्वारा संलग्न पोस्ट के अवलोकन से प्रथमदृष्टया यह स्पष्ट होता है कि राहुल ने जो भी बयान दिया, वह लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में लोकहित में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए दिया था। लोकसभा में दिए गए इस बयान को ही चलचित्र सहित पोस्ट किया गया, जो पूर्ण रूप से वैधानिक है।
भारत के संविधान के अनुच्छेद 105 (2) का हवाला दिया गया है, जिसके अनुसार “संसद में या उसकी किसी समिति में संसद के किसी सदस्य द्वारा कही गई किसी बात या दिए गए किसी मत के संबंध में उसके विरुद्ध किसी न्यायालय में कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी।
राहुल द्वारा कोई मानहानि अथवा अपमान नहीं किया गया है। यह परिवाद राहुल की छवि धूमिल करने, उनसे अवैध धन वसूली करने और राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से झूठा, फर्जी और भ्रामक तरीके से प्रस्तुत किया गया है। इसे निरस्त किया जाना आवश्यक है।
