शिमला। हिमाचल प्रदेश से निर्विरोध राज्यसभा सदस्य निर्वाचित अनुराग शर्मा के खिलाफ नामांकन प्रक्रिया के दौरान संपत्ति के विवरण छिपाने और चुनावी नियमों के उल्लंघन का आरोप लगा है। इस संबंध में निर्वाचन आयोग, राज्यसभा सचिवालय और हिमाचल प्रदेश विधानसभा के रिटर्निंग ऑफिसर से शिकायत की गई है। यह शिकायत धर्मशाला की अधिवक्ता निताशा कटोच ने दायर की है।
शिकायत में कहा गया है कि अनुराग शर्मा, निवासी गांव बीड़, तहसील बैजनाथ, जिला कांगड़ा को नौ मार्च को हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्वाचित घोषित किया गया। लेकिन उनके नामांकन के साथ दाखिल किए गए चुनावी हलफनामे में उनकी संपत्तियों का पूरा और सही विवरण प्रस्तुत नहीं किया गया, ये जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 33 के तहत अनिवार्य है।
शिकायत में उल्लेख किया गया है कि कानून के अनुसार किसी भी प्रत्याशी को नामांकन पत्र दाखिल करते समय अपनी और अपने परिवार की चल और अचल संपत्तियों का पूरा विवरण देना अनिवार्य होता है। यदि कोई जानकारी जानबूझकर छिपाई जाती है तो यह कानून का उल्लंघन माना जाता है।
कई संपत्तियों का विवरण नहीं दिया
शिकायत के अनुसार निर्वाचन आयोग के पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी से यह सामने आया है कि अनुराग शर्मा द्वारा कई भूमि संपत्तियों का विवरण हलफनामे में नहीं दिया गया। इनमें जिला कांगड़ा के बैजनाथ और मुल्थान क्षेत्रों के साथ-साथ जिला मंडी के जोगिंद्रनगर क्षेत्र में स्थित कई भूमि खातों का विवरण शामिल है। शिकायत में इन संपत्तियों के खाता नंबर और संबंधित गांवों का भी उल्लेख किया गया है।
भूमि संपत्ति सहित हथियार की जानकारी भी नहीं दी
शिकायत में यह भी कहा गया है कि भूमि संपत्ति के अलावा एक लाइसेंसी हथियार से संबंधित विवरण भी नामांकन के दौरान प्रस्तुत दस्तावेजों में सही प्रकार से प्रदर्शित नहीं किया गया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस मामले में विधानसभा सचिव द्वारा आनन-फानन में प्रमाण पत्र जारी किया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शिकायतकर्ता ने कहा है कि यदि किसी उम्मीदवार के पास सरकारी अनुबंध लंबित हैं तो उसके संबंध में स्पष्ट स्थिति होने के बाद ही प्रमाण पत्र जारी किया जाना चाहिए था।
