By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
lokmatujalalokmatujalalokmatujala
  • Home
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • दिल्ली/एनसीआर
    • हरियाणा
    • पंजाब
    • राजस्थान
    • बिहार
    • मध्यप्रदेश
    • झारखंड
    • हिमाचल प्रदेश
    • महाराष्ट्र
  • राष्ट्रीय
  • अर्न्तराष्ट्रीय
  • धार्मिक
  • मनोरंजन
    • खेल
    • बॉलीवुड
  • क्राइम
  • राजनीति
  • बिज़नेस
Notification Show More
Font ResizerAa
lokmatujalalokmatujala
Font ResizerAa
  • Home
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • अर्न्तराष्ट्रीय
  • धार्मिक
  • मनोरंजन
  • क्राइम
  • राजनीति
  • बिज़नेस
  • Home
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • दिल्ली/एनसीआर
    • हरियाणा
    • पंजाब
    • राजस्थान
    • बिहार
    • मध्यप्रदेश
    • झारखंड
    • हिमाचल प्रदेश
    • महाराष्ट्र
  • राष्ट्रीय
  • अर्न्तराष्ट्रीय
  • धार्मिक
  • मनोरंजन
    • खेल
    • बॉलीवुड
  • क्राइम
  • राजनीति
  • बिज़नेस
Follow US
Home » Blog » कागज के बड़े दावों के बावजूद परिवहन और स्टॉक के ठोस प्रमाण नहीं, मीडिया संस्थान में कर घोटाले की जांच
पंजाबराज्य

कागज के बड़े दावों के बावजूद परिवहन और स्टॉक के ठोस प्रमाण नहीं, मीडिया संस्थान में कर घोटाले की जांच

lokmatujala
Last updated: March 3, 2026 3:26 am
By lokmatujala
Share
7 Min Read
SHARE

फर्जी लेन-देन, संदिग्ध सप्लायर और बिना परिवहन रिकॉर्ड के किया गया करोड़ों रुपए का खेल

विज्ञापन एजेंसियां भी घेरे में, जांच के दबाव में एक फर्म ने जमा किए 16.35 लाख रुपए का टैक्स

चंडीगढ़, 02 मार्च 2026: पंजाब केसरी ग्रुप में बीते तीन वर्षों में 65 करोड़ रुपए से ज्यादा के लेन-देन से जुड़ा एक बड़ा कर घोटाला उजागर होने से मीडिया जगत में हलचल मच गई है। यह मामला द हिंद समाचार लिमिटेड से संबंधित है, जो पंजाब केसरी ग्रुप की एक प्रमुख इकाई है। पूरे प्रकरण का खुलासा पंजाब के टैक्स विभाग की विस्तृत जांच के बाद हुआ है। पंजाब वस्तु एवं सेवा कर कानून के तहत कर निर्धारण और जुर्माने की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी गई है।

5 फरवरी 2026 को जालंधर के सिविल लाइंस स्थित मुख्य कार्यालय पर जांच की गई। इसके साथ ही लुधियाना और बठिंडा की इकाइयों में भी एक साथ कार्रवाई की गई। यह पूरी कार्रवाई कर विवरणियों की गहन पड़ताल, माल ढुलाई से जुड़े प्रपत्रों की जांच और टोल प्लाजा के रिकॉर्ड के मिलान के आधार पर की गई।

16,807 मीट्रिक टन अखबारी कागज का दावा, लेकिन परिवहन का कोई ठोस प्रमाण नहीं

जांच में सामने आया कि पिछले तीन वित्तीय वर्षों में कंपनी ने लगभग 16,807 मीट्रिक टन अखबारी कागज की खरीद और आपूर्ति दिखाई। इसमें 10,247 मीट्रिक टन सीधी खरीद और 6,560 मीट्रिक टन अपनी ही दूसरी इकाइयों को भेजा गया माल शामिल है। इन लेन-देन का कुल मूल्य लगभग ₹65.61 करोड़ बताया गया है।

यह मात्रा 21 करोड़ से ज्यादा अखबारों की छपाई के बराबर बताई गई है, 13 करोड़ प्रतियां सीधी खरीद से और 8 करोड़ प्रतियां अन्य इकाइयों को भेजे गए कागज से संबंधित दर्शाई गई हैं।

लेकिन जब माल ढुलाई के प्रपत्रों को वाहन संचालन के रिकॉर्ड और टोल प्लाजा के आंकड़ों से मिलाया गया, तो स्थिति चौंकाने वाली निकली। जांचे गए 407 प्रपत्रों में से 219 में “कोई आवाजाही नहीं” दर्ज पाई गई। कई मामलों में जिन वाहनों का उल्लेख था, वे जालंधर की ओर जाते ही नहीं दिखे। वे राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में दर्ज पाए गए।

457 बाहर भेजे गए माल के प्रपत्रों के मामले में भी टोल रिकॉर्ड से यह साबित नहीं हो सका कि माल वास्तव में अपने गंतव्य तक पहुंचा। जांच के दौरान माल रसीद, भाड़े का रिकॉर्ड और सामान प्राप्ति की पावती भी प्रस्तुत नहीं की गई।

इन तथ्यों से यह स्पष्ट होता है कि कागजों में दर्ज लेन-देन और जमीन पर वास्तविक गतिविधि में गंभीर अंतर है। सवाल उठता है कि क्या करोड़ों का यह लेन-देन केवल दस्तावेजों तक सीमित था?

रद्द और संदिग्ध पंजीकरण वाले सप्लायरों से खरीद

जांच में यह भी सामने आया कि जिन सप्लायरों से खरीद दिखाई गई, उनमें से कई का कर पंजीकरण पहले ही रद्द या निलंबित किया जा चुका था या वे संदिग्ध पाए गए। पूरी आपूर्ति श्रृंखला में आपस में जुड़ी कंपनियों का एक सीमित नेटवर्क सामने आया, जिसका किसी बड़े और विश्वसनीय निर्माता या आयातक से सीधा संबंध नहीं मिला। इससे यह आशंका और मजबूत होती है कि खरीद और आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा केवल कागजी व्यवस्था के सहारे चलाया गया।

विज्ञापन एजेंसियां भी घेरे में

इस मामले में 10 विज्ञापन एजेंसियों की भी जांच की गई। लुधियाना की एक एजेंसी ने जांच के दौरान ₹16.35 लाख स्वेच्छा से जमा कर दिए। यह जमा राशि इस बात का संकेत मानी जा रही है कि जांच का दायरा केवल एक इकाई तक सीमित नहीं है। बाकी एजेंसियों के मामलों में जांच जारी है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर कागज नहीं आया तो अखबार छपे कैसे? अगर इतनी बड़ी मात्रा में अखबारी कागज वास्तव में नहीं पहुंचा, तो घोषित संख्या में अखबारों की छपाई कैसे हुई?

घोषित खरीद 13 करोड़ अखबारों की छपाई के बराबर है और 8 करोड़ प्रतियों के बराबर कागज अन्य राज्यों में भेजा गया बताया गया है। लेकिन जांच के दौरान स्टॉक का पूरा हिसाब, कागज की खपत का स्पष्ट रिकॉर्ड और माल की आवाजाही का रजिस्टर पेश नहीं किया गया। यह सवाल अब सीधे तौर पर कंपनी के दावों की विश्वसनीयता पर खड़ा है।

मामला सिर्फ कर चोरी तक सीमित नहीं

जब अखबारों की प्रसार संख्या के आधार पर विज्ञापन, विशेषकर सरकारी विज्ञापन दिए जाते हैं, तब उत्पादन और वास्तविक स्थिति में अंतर सार्वजनिक धन के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

संदिग्ध खरीद, कर में अनुचित लाभ और बिना ठोस प्रमाण के दिखाई गई आपूर्ति को एक साथ देखें तो पिछले तीन वर्षों में ₹65 करोड़ से ज्यादा का लेन-देन जांच के घेरे में है।

यह कोई साधारण चूक नहीं है। यह कोई मामूली लेखा त्रुटि नहीं है। यह एक सुनियोजित और व्यवस्थित ढांचे की ओर संकेत करता है, जिसमें कागजों पर बड़े पैमाने पर लेन-देन दिखाए गए, लेकिन जमीन पर उनके ठोस प्रमाण सामने नहीं आए।

राज्य सरकार ने स्पष्ट कहा है कि कोई भी संस्था, चाहे उसका प्रभाव कितना भी बड़ा क्यों न हो, कानून से ऊपर नहीं है। मीडिया संस्थान भी आर्थिक जवाबदेही से बाहर नहीं हैं। प्रेस की स्वतंत्रता का अर्थ कर नियमों से छूट नहीं है।

कानून के तहत आगे खातों का मिलान किया जा रहा है, संबंधित व्यक्तियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और वित्तीय लेन-देन की गहराई से जांच जारी है। साक्ष्यों के आधार पर आगे कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

सरकार ने दो टूक कहा है कि सार्वजनिक धन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। गलत दावों और गलत प्रस्तुतियों को चुनौती दी जाएगी। जवाबदेही तय होगी और आवश्यकता पड़ी तो पूरी वसूली भी की जाएगी।

Share This Article
Facebook Copy Link Print
Leave a Comment Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Fast Four Quiz: Precision Medicine in Cancer

How much do you know about precision medicine in cancer? Test your knowledge with this quick quiz.
Get Started
सत्य साईं संजीवनी अस्पताल गर्भस्थ शिशुओं के लिए करेगा फीटल स्क्रीनिंग की निशुल्क सेवा शुरू, पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने किया 5 बेड के शिशु सघन चिकित्सा कक्ष का उद्वघाटन

स्वरूप पुरी/सुनील पाल रायवाला स्थित श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल चिकित्सा के…

पुत्र मोह पर हरदा की सफाई, परिवारवाद का आरोप, हरदा का क्या जवाब

गिरीश खडायत / सुनील पाल  हरिद्वार लोकसभा सीट से अपने बेटे वीरेंद्र…

14 से 20 अप्रैल तक चलेगा अग्निशमन सप्ताह, अग्निशमन दिवस पर जनजागरूकता रैली निकाल लोगो को किया जागरूक

सुनील पाल / स्वरुप पूरी  हरिद्वार - आज अग्निशमन दिवस के अवसर…

Your one-stop resource for medical news and education.

Your one-stop resource for medical news and education.
Sign Up for Free

You Might Also Like

झारखंड

सत्तारूढ़ दल झामुमो को मिला नया नेतृत्व, हेमंत सोरेन केंद्रीय अध्यक्ष नियुक्त

By lokmatujala
उत्तराखंड

“मुठभेड़ के बाद खुला हत्या का राज़, पूर्व प्रधान श्याम सिंह की मौत के जिम्मेदार पहुंचे सलाखों के पीछे”

By lokmatujala
उत्तराखंड

रामनगर हादसा: सड़क सुरक्षा की अनदेखी, कई महीनों में दस से अधिक दुर्घटनाएं

By lokmatujala
उत्तराखंड

सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने विकास कार्यों की प्रगति की करी समीक्षा 

By lokmatujala

संपर्क सूत्र
Name – Mohammad Qasim
Phone No. – 7388521213
Email ID – lokmatujala@gmail.com
Address – 89/148-C Dalel Purwa
(Near Bansmandi Police Chowki)
Kanpur- 208001

Company
  • Privacy Policy
  • About Us
  • Contact Us
  • Disclaimer
नायब सिंह सैनी का बजट भाषण: केसरी पगड़ी और गुरु नानक के संदेश में पंजाब चुनाव का इशारा
March 3, 2026
नायब सिंह सैनी के बजट 2026-27 पर यमुनानगर में सियासी बहस: भाजपा ने तारीफ की, विपक्ष ने किया खारिज
March 3, 2026

Copyright © 2025 लोकमत उजाला. All Rights Reserved. designed by Sorit Chaudhary

Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?