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Home » Blog » इस्तीफा देने वाले पीसीएस अलंकार अग्निहोत्री को बड़ा ऑफर, शंकराचार्य ने की बात, क्या बोले?
उत्तर प्रदेशराज्य

इस्तीफा देने वाले पीसीएस अलंकार अग्निहोत्री को बड़ा ऑफर, शंकराचार्य ने की बात, क्या बोले?

lokmatujala
Last updated: January 27, 2026 4:06 am
By lokmatujala
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10 Min Read
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प्रयागराज: बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने गणतंत्र दिवस पर अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने कहा कि UGC के नए कानून और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों की पिटाई से आहत होकर उन्होंने इस्तीफा दिया. इन सबके बीच एक वीडियो सामने आया है, जिसमें ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद माघ मेले में अपने शिविर से अलंकार अग्निहोत्री से फोन पर बात कर रहे हैं. इस दौरान वे कहते हैं कि सरकार ने जो पद दिया था, धर्म के क्षेत्र में उससे बड़ा पद आपके लिए प्रस्तावित करते हैं.

फोन पर क्या बात हुई
‘महाराज जी चरण स्पर्श, मैं अलंकार अग्निहोत्री बोल रहा हूं.’

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने जवाब दिया, ‘जी नारायण, कैसे हैं आप? हम लोगों के मन में दो तरह की प्रतिक्रिया आपके समाचार सुनने से हो रही है. एक तो दुख हो रहा है कि कितनी लगन से आपने पढ़ाई लिखाई की होगी, तब जाकर आप इस पद पर आए होंगे. आज एक झटके से आपका पद चला गया. दूसरी तरफ जिस तरह से सनातन धर्म के प्रति, सनातन धर्म के प्रतीकों के प्रति आपने गहन निष्ठा का प्रदर्शन किया है, उससे पूरा सनातनी समाज आह्लादित है और आपका कोटि कोटि अभिनंदन करता है. हम चाहते हैं आपके जैसे निष्ठावान लोग सनातन धर्म की सेवा में और आगे आएं. जो पद सरकार ने आपको दिया था, उससे बड़ा धर्म के क्षेत्र का पद हम आपको प्रस्तावित करते हैं.’
इसके बाद उधर से अलंकार अग्निहोत्री ने कहा, ‘ठीक है महाराज जी, जल्द ही आपका आशीर्वाद लेते हैं और मिलते हैं.’
शंकराचार्य- ‘जी अग्निहोत्री जी, नारायण नारायण.’

शंकराचार्य शिविर के बाहर हजारों संत आज रमाएंगे धूनी: प्रयागराज के माघ मेला क्षेत्र में ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर विवाद और समर्थन दोनों तेज होते जा रहे हैं. सोशल मीडिया पर उनके बयानों और रुख को लेकर अलग अलग मत सामने आ रहे हैं, वहीं संत समाज भी दो धाराओं में बंटा नजर आ रहा है. कुछ संत खुलकर उनके समर्थन में हैं तो कुछ ने असहमति जताई है. इसी बीच महामंडलेश्वर कंप्यूटर बाबा के नेतृत्व में मंगलवार सुबह 9 बजे से 11 बजे के बीच बड़ी संख्या में संत शंकराचार्य के शिविर के बाहर धूनी रमाने की तैयारी में हैं. इसे शंकराचार्य के समर्थन के प्रतीकात्मक प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है. आयोजन से मेला क्षेत्र में धार्मिक और सामाजिक हलचल बढ़ने की संभावना है, जिस पर प्रशासन की नजर भी बनी हुई है.

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अड़े, धरना दसवें दिन भी जारी: प्रयागराज के माघ मेला क्षेत्र में ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच जारी टकराव अब लंबा खिंचता जा रहा है. प्रशासन की ओर से दो नोटिस दिए जाने और जमीन व सुविधाएं रद्द करने की चेतावनी के बावजूद शंकराचार्य अपने रुख पर कायम हैं. उनका कहना है कि वे टुकड़ों पर पलने वाले नहीं हैं. प्रशासन चाहे तो भूमि आवंटन और सुविधाएं वापस ले सकता है, उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. वे साफ कह चुके हैं कि जब तक प्रशासन सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगता और उन्हें ससम्मान संगम स्नान नहीं कराता, तब तक वे शिविर में प्रवेश नहीं करेंगे.

डिप्टी सीएम दो बार कर चुके हैं स्नान करने की अपील: उधर, प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य दो बार शंकराचार्य से माफी मांग चुके हैं और स्नान के लिए विनती कर चुके हैं. डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के बयान को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सकारात्मक बताया था. उन्होंने कहा था कि उन्हें कम से कम यह समझ है कि प्रशासन से गलती हुई है.

मुख्यमंत्री योगी ने दिया था कालनेमि वाला बयान: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा हाल में दिए गए ‘कालनेमि’ वाले बयान पर भी शंकराचार्य ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने कहा कि कालनेमि का अर्थ समझा जाए तो वह ऐसा व्यक्ति है, जो बाहर से साधु और भीतर से कुछ और हो. उन्होंने राज्य में गौहत्या और गौमांस तस्करी के मामलों का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि असली दोषी कौन है? यह बयान राजनीतिक और धार्मिक हलकों में नई बहस का कारण बना.

मौनी अमावस्या के दिन स्नान को लेकर शुरू हुआ था विवाद: इस विवाद की शुरुआत 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन से हुई, जब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिष्यों और अनुयायियों के साथ संगम स्नान करने पालकी से जा रहे थे. प्रशासन ने भीड़ और सुरक्षा कारणों का हवाला देकर उन्हें रोका, जिसके बाद धक्कामुक्की और तनाव की स्थिति बनी. वे बिना स्नान किए लौटे और तभी से शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए. मेला प्रशासन की ओर से 19 जनवरी को पहला नोटिस और 22 जनवरी को दूसरा नोटिस जारी हुआ. 23 जनवरी को उनकी तबीयत बिगड़ी, लेकिन उन्होंने अपना धरना जारी रखा और मीडिया से बातचीत में प्रशासन व सरकार के रुख पर सवाल उठाए. अब धरने का यह दसवां दिन है.

गणतंत्र दिवस पर फहराया तिरंगा: प्रयागराज के माघ मेले में ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने शिविर के बाहर सोमवार को तिरंगा फहराकर गणतंत्र दिवस मनाया. इस मौके पर उन्होंने 26 जनवरी की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक व्याख्या भी की. उनका कहना था कि इसी तिथि को भीष्म अष्टमी भी होती है और भीष्म पितामह को अटल संकल्प और धर्मनिष्ठा का प्रतीक माना जाता है. उनके अनुसार, भारत को गणतंत्र घोषित करने के लिए इस दिन का चयन देश के उज्ज्वल और दृढ़ भविष्य के संकल्प से जुड़ा था. उनका कहना है कि देश 78 सालों से गणतंत्र घोषित है, लेकिन 26 जनवरी को ही यह घोषणा क्यों हुई, यह आज तक लोगों को ठीक से नहीं बताया गया.

दुर्भाग्य से देश ने भीष्म अष्टमी को भुला दिया : उन्होंने कहा कि जैसे ही देश गणतंत्र घोषित हुआ, आम लोगों की आवाज को दबा दिया गया. जब देश को गणतंत्र घोषित करना था, तब भीष्म अष्टमी का ही दिन इसलिए चुना गया, क्योंकि उन्होंने पूरा जीवन राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित किया था. वह धर्म के भी ज्ञाता थे. यह दुर्भाग्य की बात है कि इसका प्रचार प्रसार नहीं हुआ. उस समय भारत में तिथियों का महत्व था, लेकिन अंग्रेजों के जाने के बाद हमारी सरकारों ने तिथियों के महत्व को भुला दिया. उन्होंने कहा कि एक सनातनी महापुरुष भीष्म पितामह के योगदान को भुला दिया गया.

अब लड़ाई नकली हिंदू बनाम असली हिंदू है: उन्होंने आगे कहा कि अब जरूरत है कि भारत को फिर से भारत बनाया जाए. भारत को इंडिया बनाया गया और अब न्यू इंडिया बनाने की तैयारी चल रही है. हालात ऐसे हैं कि सनातनियों और सनातन शास्त्रों पर भी प्रहार हो रहा है. माघ मेले में शंकराचार्य, बटुकों और संतों पर हुआ व्यवहार भी उसी का परिणाम है. उन्होंने कहा कि नकली हिंदू बाजार में आ गए हैं, जो हिंदू नाम लेकर देश को दूसरी दिशा में ले जा रहे हैं.
गौ संरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि जिन गौ माता की सेवा के लिए लोगों ने प्राणों की आहुति दी, उन्हीं की हत्या हो रही है और गौमांस का व्यापार बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि हिंदू की पहचान उसका गोत्र है और गोत्र का अर्थ गौ की रक्षा से जुड़ा है. उन्होंने केंद्र और प्रदेश सरकारों पर भी सवाल उठाए और कहा कि गौहत्या और गौमांस निर्यात पर प्रभावी रोक नहीं लग सकी.

उन्होंने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि एक ओर धर्म था और दूसरी ओर अधर्म, एक ओर संसाधन थे और दूसरी ओर केवल धर्म का बल. अंत में विजय धर्म की हुई. उन्होंने कहा कि संसाधन भले न हों, लेकिन विश्वास है कि अंततः जीत धर्म की ही होगी.

शंकराचार्य को मिला समर्थन

26 जनवरी को माघ मेला में धरने पर बैठे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर में सुबह 10 बजे गंगा तिरंगा कार्यक्रम आयोजित हुआ. जिसमें हिंदू समाज पार्टी के राष्ट्रीय संगठन मंत्री राजेश मिश्रा व प्रदेश अध्यक्ष अंकित तिवारी सम्मिलित हुए. ध्वजारोहण के उपरांत शंकराचार्य से मिलकर प्रदेश अध्यक्ष अंकित तिवारी ने समर्थन पत्र सौंपा. जो कि फर्रुखाबाद के निवासी है.

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