लखनऊ। स्वास्थ्य के क्षेत्र में एआइ आधारित सिस्टम की उपयोगिता को लेकर होटल सेंट्रम में आयोजित दो दिनी कांफ्रेंस में विशेषज्ञों ने जांच और इलाज में होने वाले सुधारों पर फोकस किया।
प्रजेंटेशन के माध्यम से दिखाया गया कि कैसे एआइ आधारित सिस्टम से गांवों तक शहर जैसी गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा व्यवस्था पहुंचाई जा सकती है। यह तकनीक गर्भवती महिलाओं में खतरे के संकेत पहचान लेती है। महिला को अस्पताल तक पहुंचाकर मां और बच्चे दोनों की जान बचा बचाई जा सकती है।
चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सचिव डा. पिंकी जोवल ने कहा कि एआइ का फायदा फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स को सशक्त बनाकर ही मिलेगा। आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, एएनएम और डाक्टर गांव-गांव तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाते हैं।
अगर तकनीक का साथ मिल जाए तो इलाज और बेहतर होगा। उन्होंने टेलीमेडिसिन और रिमोट केयर बढ़ाने पर विशेष जोर दिया, जिससे दूर-दराज के इलाकों तक डाक्टरों की सलाह पहुंचाई जा सके। कहा कि करीब 1.80 लाख आशा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, एएनएम और चीफ हेल्थ अफसर स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं।
कहा कि एआइ आधारित टूल्स ऐसे होने चाहिए, जो काम का बोझ न बढ़ाएं। आयुष्मान आरोग्य मंदिर जैसे केंद्रों में एआइ का प्रयोग कर दूरस्थ क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवा दे सकते हैं।
विशेषज्ञों ने कहा कि मरीज की सहमति के बिना डाटा का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। लोग सिस्टम पर भरोसा करेंगे, तभी वो नई तकनीक को अपनाएंगे।
एआइ की मदद से मातृ मृत्यु दर को कम किया जा सकता है। कार्यक्रम में अरविंद कुमार महानिदेशक, साफ्टवेयर टेक्नोलाजी पार्क्स आफ इंडिया, प्रो. आर के सिंह एसजीपीजीआई, डा. संजय सूद सी-डैक, मोहाली, प्रो. श्रीराम गणपति और कर्नल समीर कंवर समेत कई अन्य शामिल हुए।
