By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
lokmatujalalokmatujalalokmatujala
  • Home
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • दिल्ली/एनसीआर
    • हरियाणा
    • पंजाब
    • राजस्थान
    • बिहार
    • मध्यप्रदेश
    • झारखंड
    • हिमाचल प्रदेश
    • महाराष्ट्र
  • राष्ट्रीय
  • अर्न्तराष्ट्रीय
  • धार्मिक
  • मनोरंजन
    • खेल
    • बॉलीवुड
  • क्राइम
  • राजनीति
  • बिज़नेस
Notification Show More
Font ResizerAa
lokmatujalalokmatujala
Font ResizerAa
  • Home
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • अर्न्तराष्ट्रीय
  • धार्मिक
  • मनोरंजन
  • क्राइम
  • राजनीति
  • बिज़नेस
  • Home
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • दिल्ली/एनसीआर
    • हरियाणा
    • पंजाब
    • राजस्थान
    • बिहार
    • मध्यप्रदेश
    • झारखंड
    • हिमाचल प्रदेश
    • महाराष्ट्र
  • राष्ट्रीय
  • अर्न्तराष्ट्रीय
  • धार्मिक
  • मनोरंजन
    • खेल
    • बॉलीवुड
  • क्राइम
  • राजनीति
  • बिज़नेस
Follow US
Home » Blog » हिमालयी सीमाओं की सुरक्षा में सैन्य–नागरिक–सामाजिक समन्वय पर राज्यपाल का जोर
उत्तराखंडराज्य

हिमालयी सीमाओं की सुरक्षा में सैन्य–नागरिक–सामाजिक समन्वय पर राज्यपाल का जोर

lokmatujala
Last updated: January 8, 2026 5:13 am
By lokmatujala
Share
6 Min Read
SHARE

देहरादून। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (से नि) गुरमीत सिंह द्वारा आज क्लेमेंट टाउन, देहरादून में आयोजित संगोष्ठी में प्रतिभाग किया गया। राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि हिमालय केवल एक भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि एक जीवंत रणनीतिक प्रणाली है, जहाँ भू-आकृति, आधारभूत संरचना, जनसंख्या, शासन और सैन्य क्षमता निरंतर परस्पर क्रिया में रहती हैं। उन्होंने कहा कि यद्यपि मध्य सेक्टर को परंपरागत रूप से अपेक्षाकृत शांत माना जाता रहा है, किंतु वर्तमान परिस्थितियाँ सतत सतर्कता और पूर्व तैयारी की मांग करती हैं। उन्होंने हिमालयी क्षेत्र, विशेष रूप से भारत-चीन सीमा के मध्य सेक्टर में, सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए सैन्य, नागरिक प्रशासन और समाज के बीच प्रभावी समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।

राज्यपाल ने कहा कि समकालीन सुरक्षा चुनौतियाँ अब केवल प्रत्यक्ष सैन्य गतिविधियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हाइब्रिड वारफेयर, ग्रे-जोन गतिविधियों, द्वि-उपयोगी आधारभूत संरचना, और सीमा क्षेत्रों में निरंतर दबाव जैसे कारकों से भी आकार ले रही हैं। ऐसे परिदृश्य में हिमालयी क्षेत्रों की दीर्घकालिक सुरक्षा केवल सैन्य तैयारियों से नहीं, बल्कि नागरिक प्रशासन, स्थानीय समुदायों और प्रौद्योगिकी के साथ प्रभावी समन्वय से सुनिश्चित की जा सकती है।

उन्होंने सीमावर्ती गांवों को राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण घटक बताते हुए कहा कि स्थानीय समुदाय केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि सीमाई सुरक्षा के सहभागी और बलवर्धक हैं। उन्होंने कहा कि ‘वाइब्रेंट विलेज’ जैसे कार्यक्रम सामाजिक और आर्थिक विकास के साथ-साथ जनसंख्या स्थिरता, लॉजिस्टिक मजबूती और सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थायी राष्ट्रीय उपस्थिति को भी सुदृढ़ करते हैं।

राज्यपाल ने उच्च हिमालयी क्षेत्रों में आधारभूत संरचना की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सड़कें, सुरंगें, पुल, हवाई संपर्क और दूरसंचार सुविधाएँ परिचालन तत्परता के अनिवार्य घटक हैं। उन्होंने चारधाम परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह न केवल तीर्थाटन और आपदा प्रबंधन को सशक्त बनाती है, बल्कि रणनीतिक गतिशीलता और सुरक्षा तैयारियों को भी मजबूती प्रदान करती है।

उन्होंने आधुनिक प्रौद्योगिकी के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि ड्रोन, उन्नत निगरानी प्रणालियाँ और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्लेटफॉर्म परिस्थितिजन्य जागरूकता और त्वरित प्रतिक्रिया में सहायक हैं, किंतु तकनीक नेतृत्व, विवेक और संस्थागत मजबूती का विकल्प नहीं हो सकती।

राज्यपाल ने यह भी कहा कि हिमालयी क्षेत्रों में पर्यावरण संतुलन का सीधा संबंध परिचालन क्षमता से है। पर्यावरणीय क्षरण से न केवल जीवन और आजीविका प्रभावित होती है, बल्कि लॉजिस्टिक्स, संचार और आपदा प्रबंधन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षा आवश्यकताओं के बीच संतुलित दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया।

अपने संबोधन के समापन पर राज्यपाल ने कहा कि हिमालयी सीमाओं की वास्तविक शक्ति शांत तैयारी, संस्थागत समन्वय और सामाजिक विश्वास में निहित है। जब सैन्य बल, नागरिक प्रशासन और समाज एकजुट होकर कार्य करते हैं, तब हिमालयी सीमाएँ अधिक सुदृढ़, स्थिर और सुरक्षित बनती हैं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि हिमालयी क्षेत्र की सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, आधारभूत संरचना के सुदृढ़ीकरण तथा सैन्य नागरिक से जुड़े विषय पर सेमिनार का होना अति महत्वपूर्ण है। कहा कि सेमिनार से निकले सुझाव हमारी सामरिक नीति को सुदृढ़ बनाने में सहायक एवं हिमालयी क्षेत्र के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, सीमित जनसंख्या जैसी चुनौतियों को देखते हुए सेना, नागरिकों, सिविल प्रशासन और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच बेहतर समन्वय होना आवश्यक है। हिमालयी क्षेत्रों में सीमाओं के आस-पास निवास करने वाले नागरिक देश की सबसे बड़ी शक्ति है, जो वास्तव में देश के आँख और कान बनकर राष्ट्रीय सुरक्षा में अहम योगदान निभाते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा करना सेना के साथ साथ प्रत्येक नागरिक का भी दायित्व है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत सीमावर्ती गांवों के विकास और सशक्तिकरण की दिशा में कार्य किया जा रहा है। कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने सीमांत गांव माणा जैसे दूरस्थ और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने ही माणा को देश के अंतिम गांव की जगह देश के प्रथम गांव बताया था। मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार सीमांत क्षेत्रों के विकास और नागरिकों के कल्याण के लिए संकल्पित होकर कार्य कर रही है।

जीओसी-इन-सी, सेंट्रल कमांड लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने मध्य क्षेत्र के बॉर्डर की चुनौतियों, नागरिक समाज के सशक्तीकरण और तकनीक के अपग्रेडेशन के साथ ही अवसंरचनात्मक विकास के संबंध में अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर राजदूत अशोक के. कांथा (सेवानिवृत्त), ब्रिगेडियर अंशुमान नारंग (सेवानिवृत्त), लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) सहित संबंधित उपस्थित थे।

Share This Article
Facebook Copy Link Print
Leave a Comment Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Fast Four Quiz: Precision Medicine in Cancer

How much do you know about precision medicine in cancer? Test your knowledge with this quick quiz.
Get Started
सत्य साईं संजीवनी अस्पताल गर्भस्थ शिशुओं के लिए करेगा फीटल स्क्रीनिंग की निशुल्क सेवा शुरू, पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने किया 5 बेड के शिशु सघन चिकित्सा कक्ष का उद्वघाटन

स्वरूप पुरी/सुनील पाल रायवाला स्थित श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल चिकित्सा के…

पुत्र मोह पर हरदा की सफाई, परिवारवाद का आरोप, हरदा का क्या जवाब

गिरीश खडायत / सुनील पाल  हरिद्वार लोकसभा सीट से अपने बेटे वीरेंद्र…

पंजाब में निवेश का नया दौर: 1.5 लाख करोड़ से अधिक निवेश और 5 लाख रोजगार

चंडीगढ़। पंजाब में निवेश का माहौल बीते कुछ वर्षों में तेजी से बदला…

Your one-stop resource for medical news and education.

Your one-stop resource for medical news and education.
Sign Up for Free

You Might Also Like

पंजाब

गोल्डन टेंपल पर खतरा बरकरार: 20वीं बार मिली बम से उड़ाने की धमकी, जांच में जुटी एजेंसियां

By lokmatujala
उत्तराखंड

स्वच्छ भारत अभियान के 10 साल पूरे होने पर देहरादून में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू कार्यक्रम में हुए शामिल

By lokmatujala
झारखंड

लातेहार में नशे में युवक ने कुल्हाड़ी से तीन लोगों की हत्या की, दो घायल

By lokmatujala
पंजाबराज्य

मान सरकार की बड़ी पहल: मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना को मिला डॉक्टरों और निजी मेडिकल कॉलेजों का मजबूत समर्थन

By lokmatujala

संपर्क सूत्र
Name – Mohammad Qasim
Phone No. – 7388521213
Email ID – lokmatujala@gmail.com
Address – 89/148-C Dalel Purwa
(Near Bansmandi Police Chowki)
Kanpur- 208001

Company
  • Privacy Policy
  • About Us
  • Contact Us
  • Disclaimer
पंजाब में निवेश का नया दौर: 1.5 लाख करोड़ से अधिक निवेश और 5 लाख रोजगार
January 12, 2026
पंजाब में 2025 में भ्रष्टाचार पर ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ नीति का असर दिखाई दिया
January 12, 2026

Copyright © 2025 लोकमत उजाला. All Rights Reserved. designed by Sorit Chaudhary

Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?